गंगा जमुना की कहानी। ganga jamuna ki kahani.

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गंगा जमुना की कहानी- एक गंगा और एक जमुना थी । दोनों बहनें एक साहूकार के खेत से जा रही थीं तब जमुना...

पीपल पथवारी की कहानी। peepal pathwari ki kahani(katha).

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पीपल पथवारी की कहानी - एक गूज़री थी । उसने अपनी बहू से कहा कि तू दूध - दही बेच आ । तो वह दूध - दही बेचने गई । कार्तिक महीना था । वहां पर सब औरतें पीपल सींचने आती थीं तो वह भी बैठ गई और औरतों से पूछने लगी कि तुम क्या कर रही हो ? तो औरतें बोलीं कि हम तो पीपल की पथवारी सींच रही हैं । तो उसने पूछा- इससे क्या होता है ? औरतों ने जवाब दिया कि इसके करने से अन्न धन मिलता है , वर्षों का बिछड़ा हुआ पति मिलता है ।

लपसी तपसी की कहानी। lapsi tapsi ki kahani.

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लपसी तपसी की कहानी - एक लपसी और एक तपसी नाम के दो भाई थे। तपसी तो भगवान की तपस्या करता था और लपसी...

पंच भिखू की कहानी। panch bhikhu ki kahani.

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पंच भीखू कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी से 5 दिन तक पंच भीखू की पूजा करें । ग्यारस बारस को नीगोट करें , तेरस को...

आंवला नवमी की कहानी।amla navami ki kahani.

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कार्तिक शुक्ल नवमी को आंवला नवमी का व्रत किया जाता है । इस आंवला नवमी के व्रत को करने से व्रत ,...

भैया दूज की कहानी। bhaiya dooj ki kahani.

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भैया दूज का पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है । इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई - बहन के पावन...

govardhan puja. govardhan puja 2021

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कार्तिक माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा अर्थात् दीपावली के दूसरे दिन प्रभात के समय गोवर्धन की पूजा की जाती है।इसके लिए घर के द्वार पर...

कार्तिक मास की कथा। kartik maas ki katha(kahani).

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कार्तिक मास की कथा - एक नगर में एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे। वे रोजाना सात कोस दूर गंगा,यमुना स्नान करने जाते थे। इतनी दूर आने-जाने से ब्राह्मणी थक जाती थी तब ब्राह्मणी कहती थी कि हमारे एक बेटा होता तो कितना अच्छा रहता। बेटे के बहू आती तो हमे घर वापस जाने पर खाना बना हुआ मिलता और बहू घर का काम भी कर देती।

अहोई अष्टमी व्रत कथा।ahoi ashtami vrat katha(kahani).

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अहोई अष्टमी व्रत कथा - प्राचीन समय की बात है एक साहूकार था। जिसके सात बेटे, सात बहुएं और एक बेटी थी। एक दिन सभी मिट्टी लेने गए तो मिट्टी खोदते समय ननंद के हाथ से श्याऊ का बच्चा मर गया। तब श्याहू माता नाराज होकर बोली कि मैं तेरी कोख बान्ध दूंगी। तब ननंद ने सब भाभियों से कहा कि मेरे बदले तुम अपनी कोख बंधवा लो।

करवा चौथ की कहानी।karva chauth ki kahani(katha).

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करवा चौथ की कहानी - एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। सातों भाई अपनी बहन के साथ रहकर खाना खाते थे कार्तिक माह में करवा चौथ आई। भाई अपनी बहन से बोले आ बहन खाना खा लेते हैं। बहन बोली आज तो मेरा करवा चौथ का व्रत है इसलिए चांद देखकर ही खाना खाऊंगी। भाइयों ने सोचा आज तो हमारी बहन भूखी रह जाएगी इसलिए एक भाई ने दिया(टोर्च) लाया, एक भाई चालनी लेकर टीले पर चढ़ गया और दीया जलाकर चलनी से ढककर चलनी में चांद दिखा दिया। भाई बोले बहन चांद उग गया , अरख दे ले ।