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नारी सशक्तिकरण पर निबंध।women empowerment essay in hindi.

नारी सशक्तिकरण पर निबंध – प्राचीन और अर्वाचीन विचारक नारी को संस्कृति एवं सभ्यता का मेरुदण्ड मानते हैं । विश्व की सभी संस्कृतियों में नारीत्व के प्रति विशेष उदार और उन्नत विचार रखे गये हैं । नारी को शक्ति का महान् भण्डार और परिवार की नींव माना जाता है। चूँकि परिवार समुदाय की नींव है, और समुदाय राष्ट्र की, अतः नारी ही समाज व राष्ट्र की नौका की वास्तविक कर्णधार है ।

परन्तु इन सब के पश्चात् भी वास्तविक रूप में नारी की स्थिति ऐसी नहीं रही है । समय के साथ इसमें अनेक परिवर्तन भी आये हैं । यदि एक समय यह देवी की तरह पूजित हुई है , तो दूसरे समय प्रताड़ित भी हुई है , और समय बदलने के साथ अपने नवीन क्रान्तिकारी रूप में भी आई है ।

सबसे पहिले भारत में भारतीय समाज में महिला उत्पीड़न , यौन हिंसा , घरेलू हिंसा अत्याचार आदर – सम्मान अपमान तथा कानूनी वैधानिक उपचारों ( संरक्षण ) के बारे में आगे विस्तार से चर्चा करने से पूर्व , वर्तमान आज महिला सशक्तिकरण का दौर है , आज महिलाएँ आंगन से लेकर अंतरिक्ष तक पहुंच गई है।

यहाँ महिला सशक्तिकरण पर निबंध(mahila sashaktikaran par nibandh) – महिला सशक्तिकरण , भारत में महिला सशक्तिकरण की क्यों जरूरत है , सशक्तिकरण क्या है । मार्ग में कौनसी बाधाएँ हैं । सुरक्षा के लिए बनाये गये कानूनों की संक्षिप्त जानकारी से अवगत कराना है ।

नारी सशक्तिकरण पर निबंध -200 शब्द। women empowerment essay in hindi.

भारत में महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु सबसे पहले समाज में व्याप्त महिला विरोधी सोच को खत्म करना बहुत जरूरी है। समाज में उपस्थित बुराइयों (दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, बलात्कार, वेश्यावृत्ति, आदि) बहुत से अपराध हैं जिन पर सरकार के द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की जरूरत है।

हमारे देश में महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर अधिकार हैं । वे देश की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती है तथा विकास में भी आधी भागीदार है । इस बात को कतई नहीं नकारा जा सकता कि आज के आधुनिक युग में महिला पुरुषों के साथ ही नहीं बल्कि उससे दो कदम आगे निकल चुकी है । महिलाओं के बिना दिनचर्या की कल्पना भी नहीं की जा सकती । भारतीय संविधान के अनुसार महिलाओं को भी पुरुषों के समान जीवन जीने का अधिकार है ।

महिलाओं के लिए नियम – कायदे और कानून तो खूब बना दिये हैं किन्तु उन पर हिंसा और अत्याचार की घटनाओं में अभी तक कोई कमी नहीं आयी है । भारत 70 % महिलाएँ किसी न किसी रूप में कभी न कभी हिंसा का शिकार होती रहती है । महिलाओं के साथ बलात्कार हिंसा की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है । देश को आजाद हुये 75 वर्ष बाद भी महिलाएँ अभी तक स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं ।

जब तक देश के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलेगा तब तक देश में महिला शक्ति का समुचित उपयोग नहीं हो सकेगा।वैदिक नारी पृथ्वी अदिति , उषा आदि को समाज में गौरव प्राप्त था , क्योंकि यहाँ नारी को माता रूप में ही प्रस्तुत किया गया था । इसीलिए कहा गया था यत्र नार्यास्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता। अर्थात् जहाँ नारियों की पूजा होती है , वहाँ देवताओं का वास होता है।

आज जरूरत है कि देश मे महिलाओं का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाए, जो देश के विकास का आधार बनेंगी।

नारी सशक्तिकरण पर निबंध – 300 शब्द। nari sashaktikaran essay in hindi.

नारी सशक्तिकरण पर निबंध के संकेत बिन्दु- 1. प्रस्तावना 2. शिक्षित नारी का समाज में स्थान 3. शिक्षित नारी आदर्श गृहिणी 4. शिक्षा और स्त्री – सशक्तीकरण 5. उपसंहार

1. प्रस्तावना– हमारे समाज में पुरुष की अपेक्षा नारी को कम महत्त्व दिया जाता है , इस कारण पुरुष को शिक्षा प्राप्त करने का सुअवसर पर्याप्त मिलता है , परन्तु नारी परिवार की परिधि में कभी कन्या , कभी नववधू या पत्नी , कभी माता आदि रूपों में जकड़ी रहती है और उसकी शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता है । प्राचीन काल एवं मध्य काल में नारी शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएँ नहीं थीं , परन्तु स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सरकार नारी शिक्षा पर ध्यान दे रही है , फिर भी अभी शिक्षित नारियों का प्रतिशत बहुत ही कम है ।

2. शिक्षित नारी का समाज में स्थान – शिक्षित नारी अपने बौद्धिक विकास और भौतिक व्यक्तित्व का निर्माण करने में सक्षम रहती है । गृहिणी के रूप में वह अपने घर – परिवार का संचालन कुशलता से कर सकती है । वह अपनी सन्तान वीरता , त्याग , उदारता , कर्मठता , सदाचार , अनुशासन आदि के ढाँचे में आसानी से ढाल सकती है ।

सुशिक्षित नारी माँ के रूप में श्रेष्ठ गुरु , पत्नी के रूप में आदर्श गृहिणी , बहिन के रूप में स्नेही मित्र और मार्गदर्शिका होती है । यदि नारी शिक्षित है । तो वह समाज – सेविका , वकील , डॉक्टर , प्रशासनिक अधिकारी , सलाहकार और उद्यमी आदि किसी भी रूप में सामाजिक दायित्व का निर्वाह कर सकती है तथा अपने समाज व देश का अभ्युदय करने में अतीव कल्याणकारिणी और सहयोगिनी बन सकती है ।

3. शिक्षित नारी आदर्श गृहिणी– प्रत्येक आदर्श गृहिणी के लिए सुशिक्षित होना परम आवश्यक है । शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति को कर्तव्य – अकर्त्तव्य एवं अच्छे बुरे का ज्ञान होता है । गुणों और अवगुणों की पहचान भी इसी से होती है । गृहस्थी का भार वहन करने के लिए सुशिक्षित गृहिणी अधिक सक्षम रहती है । वह परिवार की प्रतिष्ठा का ध्यान रखती है , अन्धविश्वासों और ढोंगों से मुक्त रहती है तथा हर प्रकार से और हेर उपाय से अपनी गृहस्थी की सुख – समृद्धशाली बनाने की चेष्टा करती है ।

4. शिक्षा और स्त्री सशक्तीकरण – शिक्षित नारियों से समाज और देश का गौरव बढ़ता है । परन्तु वर्तमान नारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है , उनके साथ समानता का व्यवहार नहीं किया जाता है तथा अनेक तरह से शोषण उत्पीड़न किया जाता है । ऐसे में शिक्षित नारी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती है । समाज का हित भी स्त्री – सशक्तीकरण से ही हो सकता है । इसके लिए स्त्री शिक्षा की तथा जन – जागरण की जरूरत है ।

वस्तुतः शिक्षित एवं सशक्त नारी ही घर – परिवार में सन्तुलन बनाये रख सकती है । देश की प्रगति के लिए नारी सशक्तीकरण जरूरी है ।

5. उपसंहार- शिक्षा प्राप्त करके नारी अपने व्यक्तित्व का निर्माण तथा घर परिवार में सुख का संचार करती है । शिक्षित नारी आदर्श गृहिणी , आदर्श माता , आदर्श बहिन और आदर्श सेविका बनकर देश के कल्याण के लिए श्रेष्ठ नागरिकों का निर्माण करती है । इसी कारण ‘ शिक्षित नारी को सुख – समृद्धिकारी ‘ कहा गया है।

उषा मेहता सावित्री बाई फुले का इतिहास और जिवन परिचय।

नारी सशक्तिकरण पर निबंध(nari sashaktikaran par nibandh) – 600 words.

नारी सशक्तिकरण पर निबंध।women empowerment essay in hindi
नारी सशक्तिकरण पर निबंध।women empowerment essay in hindi

नारी सशक्तिकरण पर निबंध संकेत बिन्दु – (1) प्रस्थावना ,(2) महिला सशक्तिकरण के मार्ग में आने वाली बाधाएँ, (3) भारत में महिला सशक्तिकरण मे सरकार की भूमिका (4) उपसंहार

प्रस्थावना –

भारत के पुरुष प्रधान समाज ने प्राचीन काल से ही नारी को अधीन रखकर उसके विकास के द्वार बंद कर रखे हैं । प्राचीन भारतीय समाज में सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों के साथ – साथ महिलाओं की स्थिति में भी परिवर्तन आता रहता है । भारत में महिलाओं की सामाजिक दशा के सम्बन्ध में भी तो जो तथ्य उपलब्ध हैं उनके अनुसार केवल वैदिक काल को ही महिलाओं के लिए स्वर्णिम काल कहा जाता है । वैदिक युग के बाद ही महिलाओं की सामाजिक स्थिति में गिरावट आने लगी है।

महिलाएं समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। महिलाओं का विकास किसी भी देश के लिए आवश्यक होता है।महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को सशक्त,मजबूत व आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए शिक्षा की आवश्यकता है। महिलाएं इतनी सशक्त हो सके कि वह अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसलें स्वयं ले सके।

महिला सशक्तिकरण के मार्ग में आने वाली बाधाएँ-

( i ) सामाजिक मापदण्ड – पुरानी और रूढ़िवादी विचारधाराओं के कारण भारत में कई सारे क्षेत्रों में महिलाओं के घर छोड़ने पर पाबंदी होती है । इस तरह के क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा या फिर रोजगार के लिए घर से बाहर जाने के लिए आजादी नहीं होती है । इस तरह के वातावरण में रहने के कारण महिलाएँ खुद को पुरुषों से कमतर समझने लगती हैं और अपने वर्तमान सामाजिक और आर्थिक दशा को बदलने में नाकाम साबित होती है ।

( ii ) कार्यक्षेत्रों में शारीरिक शोषण – कार्यक्षेत्र में होने वाला शोषण भी महिला सशक्तिकरण में एक बड़ी बाधा है । निजी क्षेत्र जैसे कि सेवा उद्योग सॉफ्टवेयर उद्योग , शैक्षिक संस्थाएँ और अस्पताल इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं । यह समाज में पुरुष प्रधानता के वर्चस्व के कारण महिलाओं के लिए और भी समस्याएँ उत्पन्न करता है । पिछले कुछ समय में कार्यक्षेत्रों में महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़ने में काफी तेजी से वृद्धि हुई है । पिछले कुछ दशकों में लगभग 17 % वृद्धि देखने को मिली है ।

( iii ) भुगतान में असमानता- भारत में महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों की अपेक्षा कम भुगतान किया जाता है । और असंगठित क्षेत्रों में यह समस्या और भी ज्यादा दयनीय है , खास तौर से दिहाड़ी मजदूरी वाले जगह पर तो यह सबसे बदतर है । समान कार्य को समान समय तक करने के बावजूद भी महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा काफी कम भुगतान किया जाता है।

( iv ) लैंगिक भेदभाव- भारत में अभी भी कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ लैंगिक स्तर पर काफी भेदभाव किया जाता है । कई सारे क्षेत्रों में तो महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर जाने की इजाजत नहीं होती है । और इसके साथ ही उन्हें आजादीपूर्वक कार्य करने या परिवार से जुड़े फैसले लेने की भी आजादी नहीं होती है और उन्हें सदैव हर कार्य में पुरुषों के अपेक्षा कमतर ही माना जाता है ।

इस प्रकार भेदभाव के कारण महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक दशा बिगड़ जाती है और इसके साथ ही यह महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है ।

( v ) अशिक्षा – महिलाओं में अशिक्षा और बीच में पढ़ाई छोड़ने जैसी समस्याएँ भी महिला सशक्तिकरण में काफी बड़ी बधाएँ हैं । वैसे तो शहरी क्षेत्रों में लड़कियाँ शिक्षा के मामले में लड़कों के बराबर हैं पर ग्रामीण क्षेत्रों में इस मामले में काफी पीछे हैं । भारत में महिला शिक्षा दर लगभग 64.4 प्रतिशत है । जबकि पुरुषों की शिक्षा दर 80.9 प्रतिशत है । बहुत सी ग्रामीण लड़कियाँ जो स्कूल जाती भी हैं , उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है और वह दसवीं कक्षा भी पास नही कर पाती हैं। ।

( vi ) बाल विवाह- हालाँकि पिछले कुछ दशकों सरकार द्वारा किये गये प्रभावी फैसलों द्वारा भारत में बाल विवाह जैसी कुरीति को काफी हद तक कम कर दिया गया है लेकिन सन् 2019 में यूनिसेफ के एक रिपोर्ट द्वारा पता चलता है कि भारत में अब भी हर वर्ष लगभग 15 लाख लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहिले ही कर दी जाती है । जल्द शादी हो जाने के कारण वयस्क नहीं हो पाती हैं । महिलाओं का विकास रुक जाता है और वह शारीरिक तथा मानसिक रूप से

( vii ) महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध– भारतीय महिलाओं के विरुद्ध कई सारे घरेलू हिंसाओं के साथ दहेज हॉनर किलिंग और तस्करी जैसे गंभीर अपराध देखने को मिलते हैं । हालांकि यह काफी अजीब है कि शहरी क्षेत्रों की महिलाएँ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के अपेक्षा अपराधिक हमलों की अधिक शिकार होती हैं ।

(viii ) कन्या भ्रूण हत्या – कन्या भ्रूण हत्या या फिर लिंग के आधार पर गर्भपात भारत में महिला सशक्तिकरण के रास्ते में आने वाले सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है । कन्या भ्रूण हत्या का अर्थ लिंग के आधार पर होने वाली भ्रूण हत्या से है , जिसके अन्तर्गत कन्या भ्रूण का पता चलने पर बिना माँ के सहमति के ही गर्भपात करा दिया जाता है ।

कन्या भ्रूण हत्या के कारण ही हरियाणा और जम्मू – कश्मीर जैसे प्रदेशों में स्त्री और पुरुष लिंगानुपात में काफी ज्यादा अंतर आ गया है । हमारे महिला सशक्तिकरण के दावे तब तक नहीं पूरे होंगे जब तक हम कन्या भ्रूण हत्या की समस्या को मिटा हीं पायेंगे।

भारत में महिला सशक्तिकरण मे सरकार की भूमिका

भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए कई सारी योजनाएँ चलायी जाती हैं महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय और भारत सरकार द्वारा भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई सारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं । उन्हीं में से कुछ मुख्य योजनाए निम्न है

( i ) बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना ( ii ) महिला हेल्पलाइन योजना ( iii ) उज्ज्वला योजना iv ) सपोर्ट टू ट्रेनिंग एण्ड एम्प्लायमेंट प्रोग्राम फॉर वूमन ( v ) महिला शक्तिकरण ( vi ) पंचायती राज योजनाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण ।

उपसंहार –

आधुनिक समय में महिलाओ का सशक्तिकरण होना अत्यंत आवश्यकत है,महिलाओं को पुरुष और सभ्यता का शिकार होने के बजाय सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
क्योंकि महिलाओं के सशक्तिकरण से ही उनका विकास सम्भव है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन पाएगी और देश में महिलाओं को पुरुषों के समान ही सम्मान प्राप्त होगा। इसी से इस समाज व देश की उन्नति होगी।

नारी सशक्तिकरण पर निबंध(महिला सशक्तिकरण पर निबंध) – 1000 शब्द। mahila sashaktikaran par nibandh.

नारी सशक्तिकरण पर निबंध के संकेत बिंदु

  1. प्रस्तावना
  2. महिला सशक्तिकरण क्या है
  3. भारत में महिला सशक्तिकरण की जरूरत
  4. महिला सशक्तिकरण के लिए दिये गये अधिकार
  5. निष्कर्ष

प्रस्तावना।

भारतीय समाज – महिला सशक्तिकरण प्राचीन एवं अर्वाचीन विचारक नारी को संस्कृति एवं सभ्यता का मेरुदण्ड मानते हैं । विश्व की सभी संस्कृतियों में नारी के प्रति विशेष उदार और उन्नत विचार रखे गये हैं । नारी को शक्ति का महान् भण्डार और परिवार की नींव माना गया है । चूँकि परिवार समुदाय की नींव है और समुदाय राष्ट्र की अतएव नारी ही समाज व राष्ट्र की नौका की वास्तविक कर्णधार है ।

महिला परिवार की धुरी होती है और परिवार राष्ट्र की इकाई । समस्त विकास चक्र इसी इकाई के आसपास घूमते हैं।

महिला सशक्तिकरण क्या है

महिला सशक्तिकरण को बेहद आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि इसमें महिलाएँ शक्तिशाली बनती हैं जिससे वह अपने से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती हैं और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है । समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तिकरण है । इसमें ऐसी ताकत है कि वह समाज और देश में बहुत कुछ बदल सके । वह समाज में किसी समस्या को पुरुषों से बेहतर ढंग से निपट सकती है ।

विकास की मुख्यधारा में महिलाओं को लाने के लिए भारत सरकार के द्वारा कई योजनाएँ चलाई गई हैं । समय के साथ महिलाओं ने अपने महत्त्व को जगजाहिर भी किया है । उसने दुनिया को बताया कि वह सिर्फ सन्तानोत्पत्ति के लिए नहीं हैं । वह कवि , लेखक , योद्धा , खिलाड़ी , राजनेता और अंतरिक्ष यात्री भी बन सकती है । उसने अपनी भूमिका को हर बार स्पष्ट और सिद्ध किया है । लेकिन क्या ऐसा सम्मान होने का सम्मान हम उसे देते हैं ?

भारत में महिला सशक्तिकरण की जरूरत ?

महिला सशक्तिकरण की जरूरत इसलिये पड़ी क्योंकि प्राचीन समय में भारत में लैंगिक असमानता थी और पुरुष प्रधान समाज था । महिलाओं को उनके अपने परिवार और समाज द्वारा कई कारणों से दबाया गया तथा उनके साथ कई प्रकार की हिंसा हुई और परिवार और समाज में भेदभाव भी किया गया ऐसा केवल भारत में ही नहीं , बल्कि दूसरे देशों में भी दिखाई पड़ता है । महिलाओं के लिए प्राचीनकाल से समाज में चले आ रहे गलत और पुराने चलन को नये रीति – रिवाजों और परम्परा में ढाल दिया गया था ।

भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मान देने के लिये माँ , बहन , पुत्री , पत्नी के रूप में महिला देवियों को पूजने की परम्परा है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं कि केवल महिलाओं को पूजने भर से देश के विकास की जरूरत पूरी हो जायेगी । आज जरूरत है कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाय जो देश के विकास का आधार बनेंगी । भारत एक प्रसिद्ध देश है जिसमें विविधता में एकता के मुहावरे को साबित किया है , जहाँ

भारतीय समाज में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं । महिलाओं को हर धर्म में , एक अलग स्थान दिया गया है जो लोगों की आँखों को ढके हुये बड़े पर्दे के रूप में कई वर्षों से आदर्श के रूप में महिलाओं के खिलाफ कई सारे गलत कार्यों को जारी रखने में मदद कर रहा है । प्राचीन भारतीय समाज दूसरी भेदभाव पूर्ण दस्तूरों के साथ सती प्रथा , नगरवधु व्यवस्था , दहेज प्रथा , यौन हिंसा , घरेलू हिंसा , गर्भ में बच्चियों की हत्या , पर्दा प्रथा , कार्यस्थल पर यौन शोषण , बाल मजदूरी , बाल विवाह तथा देवदासी प्रथा आदि परम्परा थी ।

इस तरह की कुप्रथा का कारण पितृसत्तात्मक समाज और पुरुष श्रेष्ठता मनोग्रन्थि है । पुरुष पारिवारिक सदस्यों द्वारा सामाजिक , राजनीतिक अधिकार ( काम करने की आजादी , शिक्षा का अधिकार आदि ) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है । महिलाओं के खिलाफ कुछ बुरे चलन को खुले विचारों के लोगों और महान् भारतीय लोगों द्वारा हटाया गया जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ भेदभाव पूर्ण कार्यों के लिए अपनी आवाज उठायी । राजा राममोहन राय की लगातार कोशिशों की वजह से ही सती प्रथा को खत्म करने के लिए अंग्रेज मजबूर हुये ।

बाद में दूसरे भारतीय समाज सुधारकों ( ईश्वरचन्द्र विद्यासागर , आचार्य विनोबा भावे , स्वामी विवेकानन्द आदि ) ने भी महिला उत्थान के लिए अपनी आवाज उठायी और कड़ा संघर्ष किया । भारत में विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिये ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने अपने लगातार प्रयास से विधवा पुनः विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत करवाई । पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले लैंगिक असमानता और बुरी प्रथाओं को हटाने के लिए सरकार द्वारा कई सारे संवैधानिक अधिकार बनायें और लागू किये गये हैं ।

हालाँकि ऐसे बड़े विषय को सुलझाने के लिए महिलाओं सहित सभी का लगातार सहयोग की जरूरत है । आधुनिक समाज महिलाओं के अधिकार को लेकर ज्यादा जागरूक है , जिसका परिणाम हुआ कि कई सारे स्वयंसेवी समूह और एन.जी.ओ. आदि इस दिशा में कार्य कर रहे हैं । महिलाएँ ज्यादा खुले दिमाग की हो रही है और सभी आयामों में अपने अधिकारों को पाने के लिए सामाजिक बंधनों को तोड़ रही है । हालाँकि अपराध इसके साथ – साथ चल रहा है ।

महिला सशक्तिकरण के लिए दिये गये अधिकार।

कानूनी अधिकारों के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए संसद द्वारा पास किये गये कुछ अधिनियम हैं।

  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम ( 1948 )
  • खान अधिनियम ( 1952 ) और कारखाना अधिनियम ( 1948 ) ( शाम 7.00 बजे से सुबह 6.00 बजे ) के बीच महिलाओं को काम पर नहीं लगाया जा सकता विशेष प्रावधान किया गया ।
  • हिन्दू विवाह अधिनियम ( 1955 )
  • हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम ( 1956 )
  • अनैतिक देह व्यापार ( रोकथाम ) अधिनियम ( 1956 )
  • दहेज निषेध अधिनियम ( 1961 )
  • मातृत्व लाभ अधिनियम ( 1961 )
  • गर्भावस्था अधिनियम ( 1971 )
  • समान पारिश्रमिक अधिनियम ( 1976 )
  • महिलाओं का अश्लील प्रतिनिधित्व प्रतिषेध अधिनियम ( 1986 )
  • सती ( रोकथाम ) अधिनियम ( 1987 )
  • राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम ( 1990 )
  • घरेलू हिंसा अधिनियम ( 2005 )
  • कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न ( रोकथाम , निषेध और निवारण ) अधिनियम ( 2013 )

निष्कर्ष

महिला सशक्तिकरण – महिलाओं का निरर्थक बन्धनों से मुक्त होकर अपने और अपने देश के बारे में सोचने की क्षमता का विकास होना ही महिला सशक्तिकरण कहलाता है । जब तक नारी अबला से सबला नहीं बनेगी और अपनी लड़ाई खुद नहीं लड़ेगी तब तक उसका शोषण होता रहेगा। यह सच है कि वासना के कीचड़ से निकलकर ही नारी मातृत्व के गौरव को प्राप्त करती है। जब तक देश के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलेगा तब तक देश में महिला शक्ति का समुचित उपयोग नहीं हो सकेगा।

भारतीय समाज में सच में महिला सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं के खिलाफ बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा जो कि समाज की पितृसत्तात्मक और पुरुष प्रभाव युक्त व्यवस्था है । जरूरत है कि महिलाओं के खिलाफ पुरानी सोच को बदलें और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाये ।

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