सूरज जी के रोट व्रत की कहानी

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एक गांव में मां और बेटी रहती थी दोनों सूरज का व्रत रखती थी एक बार सूरज जी के व्रत के दिन मां पानी भरने गई तो बेटी को दो रोट बनाने के लिए कह कर गई। एक बड़ा रोट मां का तथा छोटा रोट बेटी के लिए  था क्योंकि इस व्रत में रोट पूरा खाना चाहिए और झूठा नहीं बचना चाहिए और एक रोटी ही खाते हैं। इस दिन बिना नमक मिलाएं रोट बनाते हैं लड़की मां का रोट बना रही थी कि  सूरज जी एक साधु बाबा के भेष में भिक्षा मांगने आए लड़की ने कहा यह रोट तो मां का है आप बैठो अभी मेरा रोट  बनेगा तब ले लेना।
बाबा ने कहां देना है तो अभी ही दो नहीं तो मैं जा रहा हूं लड़की ने मां के रोट से एक टुकड़ा तोड़कर बाबा को दे दिया जब मां वापस आई तो रोटb का टुकड़ा टूटा हुआ देख कर नाराज हुई और कहा ” धीए बाई धिए दे” रोटा माइली कोर  दे मारो दे पण सारो दे।
मां अपनी बेटी को मारने लगी।बेटी मार से बचने के लिए वहां से भागकर जंगल में चली गई और  बड़  के पेड़ पर चढ़कर बैठ गई।
सूरज भगवान ने सोचा कि इसको मेरी वजह से घर से निकलना पड़ा तो इसकी रक्षा भी मुझे ही करनी है।
सूरज भगवान रोज चूरमे का एक लड्डू और पानी का लौटा उस लड़की के पास भेज देते थे।लड़की मजे से खा कर वहां ही बैठी रहती ।
एक दिन एक राजा शिकार खेलता हुआ उधर से जा रहा था ।राजा थक जाता है और वहां पर विश्राम के लिए उस बड़ के पेड़ के नीचे रुक जाता है।
उसके साथ आए नाई से कहा की थोड़ा पानी मिल जाता तो प्राण बच जाते । प्यास से जान निकली जा रही हैं।ये सुनकर उस लड़की ने अपने लौटे में से चुल्लू भर पानी डाल दिया ।
राजा ने फिर कहा की आधी जान तो बच गई यदि थोड़ा पानी और मिल जाता तो आधी जान और बच जाती । यह सुनकर लड़की ने चुल्लू भर पानी और डाल दिया।
राजा को बताया कि राजा जी तुम  रानी लेकर आए हो या जाटनी लाए हो। जाटो जैसा रोट बनाया आप खाओगे तो आपका पेट दर्द होने लगेगा और रानी खाएगी तो राजकुमार का पेट दर्द होगा राजा की रानी ने बात सुन ली और रोट को कटोरी के नीचे छुपा दिया। और मन में ही सूरज भगवान से सहायता करने के लिए विनती करने लगी जब राजा आया और उसने पूछा की कटोरी के नीचे क्या है फिर राजा ने स्वयं ही कटोरा उठाया तो उसके नीचे से सोने का सिक्का निकला राजा ने कहा बोदे से पीहर वाले ऐसे बिदड़ी भेजते हैं क्या?
कुछ दिनों बाद रानी एक दिन खिड़की से बाहर की तरफ देख रही थी तो उसने देखा कि उसकी मा झाजले बेच रही है। उसने अपनी मां को वहां बुला लिया इतने नौकर चाकरो में वह भी पड़ी रहेगी और किसी को पता नहीं लगेगा कि उसकी मां है यह सोचकर उसने अपनी मां को बुलाया। लेकिन वह आते ही फिर वही बात दोहराने लगी “धिये माई धीये  दे रोटी माइली कोर म्हारो दे पण सारो दे”
यह सुनकर रानी ने सोचा कि ऐसे तो सबको पता चल जाएगा कि यह मेरी मां है। तो देवरानी और जेठानी सब मेरी हंसी उड़ाएंगी उसने मां को एक कोठी में बंद कर दिया और उसके ताला लगा दिया। राजा के आते ही रानी की देवरानी और जेठानी ने कहा कि आप रानी लाए हो या डाकन भूतनी। आज एक औरत महल में घुसी और बाहर ही नहीं निकली रानी ने सुन लिया और सूरज भगवान से प्रार्थना करने लगी कि हे भगवान इस विपत्ति से तुम ही बचाओ राजा ने आते ही कोठे की चाबी मांगी रानी ने दे दी जब राजा ने कोठा बीखोला तो उसमें से सोने की मूर्ति मिली। राजा ने रानी से पूछा कि यह मूर्ति कहां से आई तो रानी ने कहा मेरे बोदे  से पीहर की बिदड़ी है। अर्थात गरीब पीहर की भेंट है रानी का कि तुम्हारा गरीब पीहर ऐसे कीमती भेंट भेज देते हैं हमें तो नहीं बुलाते मुझे मेरा ससुराल देखना है रानी ने  फिर सूर्य भगवान से प्रार्थना की तो भगवान सूर्य ने कहा बाई मैं राजा को सवा पहर का ससुराल दिखा दूंगा। इसके बाद मुझे मेरी नगरी में उजाला करने जाना है सूर्य भगवान भाई बनकर बुलाने आ गए रानी ने मुश्किल से ही किसी प्रकार राजा को मनाया सूरज भगवान ने बहुत  गहना कपड़ा देकर राजा रानी को विदा किया।
आते समय आगे जाकर राजा बोला मैं तो मेरी धोती और एक पांव की जूती भूल आया हूं। नाई तुम जाकर लेकर आओ।
रानी ने कहा कि मेरे पीहर से इतना नया कपड़ा मिला है उस पुरानी धोती  को खो जाने दो।
रानी को डर था कि सूरज भगवान द्वारा बनाई गई काल्पनिक माया नगरी अब समाप्त हो चुकी होगी नाई अगर वापस वहां जाएगा तो मेरा भेद खुल जाएगा। राजा को रानी पर संदेह हो गया था इसलिए वह उस भेद का पता लगाना चाहता था उसने नाई को भेज दिया। वापस जाकर नाई देखा कि वहां तो केवल जंगल ही है जहां चूरमा बाटी बनाया था वहां पर जगरे   की राख उड़ रही थी। दूर-दूर तक वहां पर ना कोई महल दिखाई दे रहा था ना ही कोई बाग बगीचा और ना ही कोई मनुष्य। केवल एक बड़े पेड़ पर धोती सूख रही थी और पेड़ के नीचे जूती पड़ी थी नाई ने जल्दी से उन्हें उठाया और वहां से भागा और राजा  को आकर सब  बताया। राजा ने तलवार निकाली और रानी की गर्दन पर रख दी और पूछा सच-सच बताओ बात क्या है रानी ने सब कुछ सच बता दिया।इस प्रकार सूरज भगवान के व्रत से ब्राह्मण की कन्या को जो राज्य सुख प्राप्त हो गया जैसा सुख उसे मिला वैसा कहानी कहने वाले सुनने वाले सब को प्राप्त हो।

सूरज जी व्रत रोट बनाने की विधि

सूरज जी के रोट व्रत की कहानीगणगौर का पूजन करने वाली लड़कियां किसी भी रविवार को सूरज जी के रोट  का व्रत कर सकती है इसके लिए एक पाटे पर जल भरकर लौटा रखें । उस पर रोली से सांठिया बनाए। रसोई बनाने के लिए एक कलश जल भरे। कच्चे सूत का आठ  तार का आठ गांठ  का डोरा 8 गेहूं के दाने हाथ में लेकर कहानी सुने। उसके बाद कलश के जल से बिना नमक के रसोई बनाएं और एक रोटा बीच में छेद वाला और एक रोटा बिना छेद वाला बनाएं। और सूरज भगवान के भोग लगाएं।

सूरज जी  रोट व्रत की पूजन सामग्री

  • रोली
  • चावल
  • मेहंदी
  • लच्छा
  • घेवर,हलवा व रोट
  • जल का लोटा
  • गंगाजल

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