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कामिका एकादशी व्रत कथा और महत्व। kamika ekadashi vrat katha(sawan ekadashi vrat katha).

कामिका एकादशी श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसका नाम कामिका एकादशी है। कामिका एकादशी के व्रत में शंख, चक्र, गदा धारी श्री विष्णु भगवान की पूजा षोडशोपचार विधि से धूप, दीप, नवैध आदि द्वारा होती है। इस व्रत के करने से मनुष्य का ब्रह्महत्या आदि के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और वह इस लोक में सुख भोगकर अंत में विष्णु लोक को जाते हैं।

कामिका एकादशी का महत्व।(kamika ekadashi significance in hindi).

श्रावण कृष्ण एकादशी(कामिका एकादशी) का व्रत करने और कामिका एकादशी की कथा(kamika ekadashi ki katha) सुनने का विशेष महत्व माना जाता है। कामिका एकादशी का व्रत करने से मनुष्य सद्गति को प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से पुत्र, धन, यश की प्राप्ति भी होती हैं और यह व्रत मनुष्य के सभी पापों को नष्ट करने वाला बताया गया है।

इस कामिका एकादशी के व्रत में काम, क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, अभिमान, चोरी, आदि बुराइयों का त्याग करना चाहिए। जो इस प्रकार विधि पूर्वक कामिका एकादशी का व्रत करता है वह संसार के सभी सुखों को भोगता हुआ स्वर्ग लोक में जाता है। इसलिए जिसे सुख और स्वर्ग की कामना हो वह कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करें और कामिका एकादशी की कथा सुने।

सावन कृष्ण पक्ष एकादशी व्रत कथा को सुनने और तुलसी जी की सेवा स्नान करने से मनुष्य की सभी यम यातनाएं नष्ट हो जाती हैं। कामिका एकादशी को श्रेष्ठतम व्रतों में से एक माना जाता है इस व्रत को करने से अधूरी इच्छाएं पूर्ण होती है कामिका एकादशी व्रत को विधिवत रखकर भगवान के सामने अपने कामना रखने से भगवान विष्णु व्यक्ति की कामना की पूर्ति करते हैं।

कामिका एकादशी व्रत कथा(kamika ekadashi vrat katha)।

कामिका एकादशी व्रत कथा और महत्व। kamika ekadashi vrat katha(sawan ekadashi vrat katha).
कामिका एकादशी व्रत कथा और महत्व।

कामिका एकादशी व्रत कथा पुराने समय में एक गांव में एक क्षत्रिय रहा करते थे वह अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे। एक बार एक ब्राह्मण और क्रोधी क्षत्रिय का किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया क्रोध में आकर क्षत्रीय ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। अतः उसने अपने अपराध और ब्राह्मण की हत्या से लगने वाले पाप को नष्ट करने के लिए व क्षमा हेतु ब्राह्मण की क्रिया करवानी चाही।

किंतु ब्राह्मणों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया जिस कारण वह ब्रह्म हत्या का दोषी हो गया इसके परिणाम स्वरूप ब्राह्मणों ने उसके घर भोजन करने से भी मना कर दिया। तब उस क्षत्रिय ने एक साधु के पास जाकर कहा कि हे साधु देवता मेरा पाप कैसे नष्ट हो सकता है इस पाप को दूर करने का मार्ग बताइए।

साधु ने उस सत्य को कामिका एकादशी का व्रत रखने और पूर्ण विधि विधान से व्रत का पालन करने तथा कामिका एकादशी व्रत कथा सुनने को कहा। मुझ सत्रीय ने साधु महाराज के बताए अनुसार ही पूर्ण विधि-विधान से कामिका एकादशी का व्रत किया तथा कामिका एकादशी व्रत कथा सुनकर व्रत पूर्ण किया।

रात्रि में जब वह भगवान की मूर्ति के पास सो रहा था तब भगवान ने उसके सपने में आकर दर्शन दिए। क्षत्रिय ने ब्राह्मण की हत्या का पश्चाताप कर लिया था इस कारण भगवान ने उसे क्षमादान दिया और समस्त पापों से मुक्त किया।

हे भगवान जिस प्रकार आपने उस सत्रीय के पापों का विनाश कर के उसको सद्बुद्धि दी उसी प्रकार कामिका एकादशी का व्रत करने वाले को कामिका एकादशी व्रत कथा सुनने वाले को और कामिका एकादशी की व्रत कथा सुनाने वाले को सभी को पापों से मुक्त करना और सद्बुद्धि देना।

यह थी सावन कृष्ण पक्ष एकादशी व्रत कथा(sawan ekadashi vrat katha) हम आशा करते हैं कि आपको कामिका एकादशी की कथा(kamika ekadashi vrat katha) पसंद आई होगी धन्यवाद।

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