पथवारी माता का पूजन और कहानी

भारतीय त्यौहारपथवारी माता का पूजन और कहानी

हिंदू संस्कृति में पथवारी माता का पूजन यात्रा की सफल मंगल कामना के लिए किया जाता है ऐसा माना जाता है कि यात्रा करने से पहले पथवारी माता का पूजन करने से यात्रा मंगलमय रहती है।
पथवारी माता का पूजन करने के लिए पथवारी माता के जल के छींटे देखकर स्नान कराएं, कुमकुम,अक्षत, लच्छा, गुड़ और सुपारी चढ़ाएं।और यात्रा की सफल कामना के हेतु प्रार्थना करें।

शीतला माता की पूजा के बाद भी  पथवारी माता की पूजा की जाती है ।

पथवारी माता की कहानी

पथवारी माता का पूजन और कहानीएक बार एक राजा के इकलोते पुत्र को शीतला  (चेचक )निकली उसी राज्य के एक काछी पुत्र को भी शीतला निकली ।
काछी परिवार बहुत गरीब था किंतु भगवती का उपासक था ।वह धार्मिक दृष्टि से सभी नियमों का पालन करता था प्रतिदिन नियमापूर्वक भगवती की पूजा होती थी ।नमक खाने पर पाबंदी थी। सब्जी में छोंक नहीं लगता था और नहीं कोई वस्तु भुनी तली  जाती थी ।गरम वस्तु न स्वयं खाता था न हीं चेचक युक्त  बालक को  खिलाता था इस प्रकार उसका पुत्र शीघ्र ठीक हो गया।
उधर जबसे राजा के लड़के को शीतला का प्रकोप हुआ था तब से ही उसने भगवती के मंडप में शतचंडी का पाठ शुरू करा रखा था। रोज हवन व बलिदान होते थे ।राजपुरोहित भी सदा भगवती के पूजन में निमग्न रहते थे। राज महल में रोज कढ़ाई चढ़ती, अनेक प्रकार के गरम स्वादिष्ट भोजन बनते, सब्जी के साथ कई प्रकार के मांस भी पकते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि उन लजीज भोजन की गंध से राजकुमार का मन मचल उठता वह भोजन के लिए जिद्द करता एक तो राज पुत्र और दूसरा इकलौता इस कारण उसकी अनुचित जिद्द भी पूरी कर दी जाती थी।
इस पर शीतला का कोप घटने के बजाय बढ़ने लगा शीतला के साथ-साथ उसके बड़े बड़े-बड़े भी निकलने लगी जिन में खुजली और जलन अधिक होती थी शीतला की शांति के लिए राजा जितने भी उपाय करता सब व्यर्थ हो जाते। एक दिन राजा के गुप्तचरों ने उसे बताया कि , काछी पुत्र को भी शीतला निकली थी पर वह बिल्कुल ठीक हो गया है। यह जानकर राजा सोच में पड़ गया कि मैं तो शीतला माता की इतनी सेवा करता हूं पूजा व अनुष्ठान में कोई कमी नहीं है ,पर मेरा पुत्र अधिक रोगी होता जा रहा है, जबकि काछी  पुत्र बिना सेवा पूजा के ही ठीक हो गया।
इसी सोच में उसे नींद आ गई श्वेत वस्त्र धारणी  भगवती ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर कहा ,हे राजन !मैं तुम्हारी सेवा अर्चना से प्रसन्न हूं इसलिए आज भी तुम्हारा पुत्र जीवित है । इसके ठीक न होने का कारण यह है कि तुमने शीतला के समय का पालन करने योग्य नियमों का उल्लंघन किया है। तुम्हारे पुत्र को ऐसी हालत में नमक का प्रयोग बंद करना चाहिए। नमक से रोगी के फोड़ों में खुजली होती है। घर की सब्जी में छोंक नहीं लगाना चाहिए,क्योंकि इसकी गंध से रोगी का मन उन वस्तुओं को खाने के लिए ललचाता है जिसे उसे नहीं खाना चाहिए। रोगी का किसी के पास आना जाना मना है, क्योंकि यह रोग  दूसरों को भी होने का भय रहता है। अतः  इन नियमों का पालन कर तेरा पुत्र अवश्य ही ठीक हो जाएगा।
विधि समझाकर  देवी अंतर्ध्यान हो गई ।
प्रातः से ही राजा ने देवी की आज्ञा अनुसार सभी कार्यों की व्यवस्था कर दी। इससे राजकुमार की सेहत पर अनुकूल प्रभाव पड़ा और वह शीघ्र ही ठीक हो गया।