जानिए माघी पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा

भारतीय त्यौहारजानिए माघी पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा

” माघ पूर्णिमा व्रत या माघी पूर्णिमा हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं । 27 नक्षत्रो में मघा नक्षत्र के नाम से ” माघ पूर्णिमा ” की उत्पत्ति होती है । इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है । ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं । इस दिन जो भी जातक गंगा स्नान करते है तथा उसके बाद जप और दान करते है उन्हें सांसारिक बंधनो से मुक्ति मिलती है ।

maghi Purnima 2022

माघी पूर्णिमा पूजा विधि

माघ पूर्णिमा के दिन सुबह सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, जलाशय में स्नान करना चाहिए।

स्नान के बाद सूर्य मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।

स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए।

मध्याह्न काल में गरीब लोगों और ब्राह्मणों को भोजन और दान-दक्षिणा देनी चाहिए।

तिल और काले तिल का दान विशेष रूप से करना चाहिए।

माघ मास में काले तिल से हवन करना चाहिए और पितरों को काले तिल का भोग लगाना चाहिए।

माघी पूर्णिमा व्रत कथा

प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर शुभवत नामक विद्वान ब्राह्मण निवास करते थे । ये बहुत ही लालची थे । इनका जीवन का मूल उद्देश्य येन केन प्रकारेण धन कमाना था तथा उन्होंने ऐसा किया भी । धन कमाते कमाते वे वृद्ध दिखने लगे । वे अनेक प्रकार के व्याधि से ग्रस्त हो गए । इसी मध्य उन्हें अचानक संज्ञान हुआ की आजतक मैंने सारा जीवन धन कमाने में ही नष्ट कर दिया है मुक्ति के लिए मैंने कुछ भी नहीं किया है । अब मेरे जीवन का उद्धार कैसे होगा ? मैंने तो आजतक कोई सत्कर्म नहीं किया है । उसी समय उन्हें अचानक एक श्लोक स्मरण आया , जिसमें माघ मास में स्नान का महत्त्व बताया गया था । शुभवत ने उसी श्लोक के अनुरूप माघ स्नान का संकल्प लिया और नर्मदा नदी में स्नान करने लगे । इस प्रकार वे लगातार 9 दिनों तक प्रातः नर्मदा के जल स्नान करते रहे । दसवें दिन स्नान के बाद उनका स्वास्थ्य खराब हो गया उनके मृत्यु का समय आ गया था वे सोचने लगे की मैंने तो आजीवन धनार्जन में लगा रहा कोई भी सत्कार्य नहीं किया अतः मुझे तो नरकलोक में ही रहना पड़ेगा परन्तु माघ मास में स्नान करने के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई ।