Homeज्येष्ठ मासMohini ekadashi vrat 2021, व्रत कथा व पूजा विधि

Mohini ekadashi vrat 2021, व्रत कथा व पूजा विधि

मोहिनी एकादशी व्रत 2021: शनिवार 22 मई

मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार समुंद्र मंथन के समय निकले अमृत को राक्षसों से बचाने व देवताओं को पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था तभी से वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाते हैं। मोहिनी एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है। तथा इस व्रत का पालन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Mohini ekadashi vrat Katha

Mohini ekadashi vrat 2021, व्रत कथा व पूजा विधि
Mohini ekadashi vrat Katha

शास्त्रों के अनुसार एक बार देवता और राक्षस मिलकर समुद्र का मंथन कर रहे थे तभी समुद्र से लक्ष्मी जी और विश के साथ अमृत का कलश निकला । लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु को वर लिया तथा विश को भगवान शंकर ने सभी को बचाने के लिए अपने कंठ में ही रोक लिया। देवता और राक्षसों के मध्य अमृत को लेकर झगड़ा हो गया। देवता चाहते थे कि अमृत उन्हें मिले तथा राक्षस चाहते थे कि अमृत उनको मिले। तब देवताओं ने भगवान विष्णु से आग्रह किया हे प्रभु! “यदि इन राक्षसों को अमृत मिल गया तो यह सदा के लिए अमर हो जाएंगे और पूरी सृष्टि पर आतंक में मचाएंगे,अब आप ही कुछ कीजिए”।

तब भगवान विष्णु ने अति सुंदर स्त्री मोहनी का रूप धारण करके सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और सारा अमृत देवताओं को पिला दिया उस दिन वैशाख शुक्ल एकादशी थी , तभी से इस एकादशी को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है।

Mohini ekadashi vrat ki puja vidhi

  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूरे घर की व पूजा स्थल की सफाई करें।
  • पूजा स्थल पर एक वेदी बनाकर सप्त धान ( गेहूं, चावल, चना, जौ, मूंग, उड़द, बाजरा) रखकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
  • वेदी पर एक जल का कलश स्थापित करें।
  • वेदी पर एक दीपक जलाएं और भगवान विष्णु की आरती उतारे।
  • भगवान विष्णु को ऋतु फल व पीले पुष्प अर्पित करें।
  • पूरे दिन निराहार रहे
  • साय काल में भगवान विष्णु की आरती व पूजा अर्चना करें।
  • भगवान विष्णु की आरती के पश्चात फलाहार ग्रहण करें।
  • रात्रि में भगवान विष्णु का भजन कीर्तन करे तथा जागरण करें।
  • दूसरे दिन सुबह ब्राह्मणों को भोजन करा कर यथाशक्ति दक्षिणा दे।
  • और भगवान को भोग (तुलसी सहित)लगाकर स्वयं भोजन करें तथा व्रत का पारण करें।

मोहिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी प्रारंभ: शनिवार 22 मई प्रातः 9.15से

एकादशी समाप्त: रविवार 23 मई प्रातः 6:45 बजे

मोहिनी एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त

सोमवार 24 मई प्रातः 05:26 बजे से 8:10 बजे तक

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