Rangbhari Ekadashi vart Katha , रंगभरी तथा आमलकी एकादशी व्रत कथा

0
रंगभरी एकादशी को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी कहा जाता है। इसे आमलकी एकादशी व्रत कहते हैं। रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की...

मंगल भौम प्रदोष व्रत कथा , Mangal Pradosh Vrat Katha in hindi

0
जो प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है वो भौम प्रदोष व्रत या मंगल प्रदोष व्रत कहलाता है। इस व्रत को रखने से भक्तों...

Mahashivratri vart khata in hindi , शिवरात्रि व्रत कहानी

0
महाशिवरात्रि के दिन भक्त जप, तप और व्रत करते हैं तथा महाशिवरात्रि की कहानी सुनते हैं। महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को होता...

जानिए माघी पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा

0
" माघ पूर्णिमा व्रत या माघी पूर्णिमा हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं । 27 नक्षत्रो में...

sankashti Ganesh Chaturthi 2022 : पूजा विधि, व्रत कथा और कहानी

0
संकष्टी चतुर्थी 2022 तिथि: संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हराने वाली चतुर्थी। भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी कष्ट हर लेते हैं,...

सोम प्रदोष व्रत कथा : som Pradosh Vrat Katha , kahani

0
प्रदोष का दिन भगवान शिव को अति प्रिय माना गया है , इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से निर्धन को धन...

रथ सप्तमी की व्रत कहानी और कथा : Ratha Saptami / Surya Saptami Vrat...

0
रथ सप्तमी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष  की सप्तमी को रखा जाता है। रथ सप्तमी (Ratha Saptami 2022) के दिन खासतौर...

रवि प्रदोष व्रत कथा | ravi Pradosh Vrat Katha ,ravi Pradosh vart kahani in...

0
हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है , रविवार को आने प्रदोष को रवि प्रदोष कहा जाता है । उत्तर भारत में...

षट्तिला एकादशी व्रत कहानी और कथा |Shattila Ekadashi vrat katha

0
षट्तिला एकादशी व्रत ( माघ कृष्ण एकादशी )इस दिन काली गाय तथा काले तिलों को दान का माहात्म्य है । शरीर पर तिल...

बसंत पंचमी की कथा।basant panchami ki katha (kahani).

0
बसंत पंचमी की कथा - उपनिषदों की कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान शिव की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने प्रकृति जीवो खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की, लेकिन वे अपनी सृजनता से संतुष्ट नहीं थे जिसके कारण चारों और मोन व्याप्त था। तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमंडल में से जल लेकर छिड़का और भगवान विष्णु की स्तुति करने लगे, स्तुति सुन भगवान विष्णु ब्रह्मा जी के समक्ष प्रकट हुऐ। उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति मां दुर्गा का आवाहन किया।