धरती माता की कहानी|dharti mata ki kahani(katha).

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धरती माता के व्रत व पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों और पुराणों में वर्णित है। धरती माता का व्रत और पूजन करते समय धरती माता की कहानी सुनी जाती है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से धरती माता की पूजा करता है तो उसे पाप कर्मों से छुटकारा मिलता है धरती माता की कहानी सुनने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

धरती माता की कहानी|dharti mata ki kahani.

धरती माता की कहानी|dharti mata ki kahani(katha).
धरती माता की कहानी। धरती माता की कथा।

धरती माता की कहानी – प्राचीन समय की बात है एक गांव में एक मां और उसका बेटा-बेटी रहा करते थे। माँ गरीब थी, वह मजदूरी करके अपने परिवार का पेट भरती थी। धीरे-धीरे दिन गुजरते गये और बच्चे बड़े होने लगे। बेटी शादी के योग्य हो गई तब मां बूढ़ी हो गई। मां ने अपने बेटे से कहा कि बेटा तेरी बहन शादी के योग्य हो गई है इसलिए तेरे जैसा घर वर देखकर उसकी शादी करना।

ऐसा बोलकर मां तो कुछ दिनों बाद मर गई। उसका भाई गांव गांव में घुमा लेकिन बहन के योग्य पति नहीं मिला। वह घूम घूम कर थक गया और एक दिन सोचने लगा कि मेरे जैसा तो इस दुनिया कोई नही है, इसलिए मैं ही इससे शादी कर लेता हूं। ऐसा सोचकर वह चुनरी और शादी के लिए सब सामान ले आया, तब उसकी बहन ने पूछा कि भाई, तुम यह सब सामान क्यों लेकर आए हो।

तब उसके भाई ने कहा कि बहन यह सब सामान तुम्हारी शादी के लिए लेकर आया हूं। गांव वालों ने बहन से कहा कि तुम्हारा भाई ही तुमसे शादी करने वाला है, तब बहन ने जाकर अपने भाई से पूछा कि भाई मेरी शादी किससे कर रहे हो। इस पर भाई ने कोई जवाब नहीं दिया, तब बहन समझ गई।

उसने एक लोटे में जल लिया, चुनरी ली और चप्पल पहनकर जंगल की तरफ चली गई। जंगल में गाय चराने वाले ग्वालो ने उससे पूछा कि कहां जा रही हो तो वह कुछ नहीं बोली। वन में जाकर वह धरती माता को पुकारने लगी और बोली कि – हे धरती मां, अब तुम ही मेरी लाज रखना वरना अनर्थ हो जाएगा।

वह बोली , मैं क्या करूं। मां मुझे अपनी गोद में ले लो, नहीं तो अन्याय हो जाएगा। तब धरती फटी तो बहन ने एक तरफ लोटा, चुनरी और चप्पल रख दिए और वह धरती में जाने लगी। इतने में दौड़ता हुआ उसका भाई जंगल में आया और उसने ग्वालो से पूछा कि मेरी बहन किधर गई है। ग्वालो ने कहा कि तेरी बहन उस तरफ गई है।

वह बहन-बहन पुकारता हुआ उस तरफ दौड़ता है ,तब वह देखता है कि उसकी बहन धरती में समा रही है। यह देखकर वह बहन को पुकारता हुआ उस तरफ दौड़ता है तब तक उसकी बहन धरती में समा चुकी थी, केवल थोड़े से बाल दिखाई दे रहे थे। वह बहन के बालों को मुट्ठी में पकड़ कर रोने लगा, बहन तू सत्य के लिए धरती मां की गोद में समा गई, मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी।

मां का वचन निभाने के लिए मेरे जैसा कोई वर नहीं मिला इसलिए ऐसा विचार आया, ऐसा बोलकर वह जोर जोर से रोने लगा। पर धरती मां ने सत्य के लिए बेटी को अपने में समा लिया। जो बाल बाहर थे वे दोब बन गए। इसलिए औरतें धरती माता की कहानी सुनती है और चुनरी, चप्पल, लोटा बर्तन में हरी मूंग और लड्डू कुंवारी कन्या को देती है।

जो भी धरती माता की कहानी सुनता है धरती माता उसको सुखी रखेगी। हे धरती माता, धरती माता की कहानी कहने, सुनने और हुकार भरने वाले सभी को सुखी रखना। बोलो धरती माता की जय।

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