कपालभाति।kapalbhati. कपालभाति क्रिया कैसे करें।

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जल नेति क्रिया करने के बाद नासिका में बचे हुए जल अंश को बाहर निकालने की क्रिया को कपालभाति क्रिया कहते हैं। कपालभाति क्रिया योग में षटकर्म अथवा हठयोग की एक क्रिया है। कपालभाती में कपाल का अर्थ मस्तिष्क और भाति का अर्थ स्वच्छता अर्थात वह किया जिससे मस्तिष्क स्वस्थ होता है। कपालभाति क्रिया करने से नासिका में जमा मेल, वायरस इत्यादि बाहर निकल जाते हैं।

कपालभाति क्रिया करने की विधि। kapalbhati steps.

1.कपालभाति क्रिया करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े होकर दोनों पांवों में करीब 15 इंच का फासला रखें।

2.अब सामने की तरफ झुककर दोनों हाथ पीछे ले जाए और हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर रखे।

3. पहले बाई तरफ गर्दन को झुका कर जोर से श्वास को बाहर निकाले।

4. अब स्वास लेते हुए एक दाहिनी और गर्दन को झुका कर श्वास को बाहर निकाले।

कपालभाति।kapalbhati. कपालभाति क्रिया कैसे करें।
कपालभाति।kapalbhati.

5. इस प्रकार दोनों और करीब दस-दस बार इस क्रिया को करें।

6. कपालभाति क्रिया में स्वास ध्वनि के साथ होना चाहिए।

7. स्वाभाविक रूप से नाक के नथुनो में कफनुमा मैले द्रव का स्राव होता रहता है। किंतु बाहरी हवा लगने से वह सूख जाता है और नासिका छिद्रों में चिपक जाता है। जल नेति क्रिया से यह मुलायम होकर नासिका दीवारों से अलग होकर कपालभाति क्रिया में बाहर फेंक दिया जाता है।

कपालभाति क्रिया के लाभ।kapalbhati benefits.

1. कपालभाती से नाक की नली में जमा मैल का अंश व मिट्टी के जमा कण बाहर निकल जाते हैं।

2. श्वास नलिका की स्वास ग्रहण करने की व निकालने की क्षमता बढ़ जाती है। आगे इससे प्राणायाम करने में सुविधा होती हैं।

3. इस क्रिया से गले की खराश, सूजन, सिरदर्द, एवं कफ जैसी तकलीफें दूर हो जाती है।

4. कपालभाति क्रिया करने से माथे और चेहरे पर चमक आती हैं।

5. कपालभाति क्रिया करने से हृदय, फेफड़े तथा थायराइड संबंधी विकार दूर होते हैं।और श्वास गहरी बनती है।

6. कपालभाति क्रिया में पेट के बार-बार अंदर जाने से आंतरिक अंगों पर दबाव बनता है जिससे अमाशय, यकृत, किडनी और पेनक्रियाज की सेहत सही बनी रहती है।

7. कपालभाति क्रिया रक्त को शुद्ध करती है तथा रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाती है जिससे शरीर ऊर्जावान बना रहता है।

8.कपालभाति क्रिया करने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि यह आपके फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि करता है जिससे आपकी स्वास्थ्य लंबी और गहरी बनती है।

कपालभाति क्रिया करते समय सावधानी:

1.जलनेति करते समय नमक का पानी काम में लिया जाता है किंतु नमक से शुष्कता आती है। अतः शुष्कता को दूर करने के लिए कपालभाति क्रिया के पश्चात कुछ घी की बूंदे नासिका में डालनी चाहिए।

2. मिर्गी के रोगियों, हर्निया और कमर दर्द के रोगियों को कपालभाति किया नहीं करनी चाहिए।

4. महिलाओं को गर्भावस्था और गर्भावस्था के तुरंत बाद कपालभाति क्रिया नहीं करनी चाहिए।

5. कपाल भाति क्रिया पूर्ण होने के पश्चात थोड़ी देर ध्यान की अवस्था में बैठे रहना चाहिये।

कपालभाति।kapalbhati. कपालभाति क्रिया कैसे करें।
कपालभाति।kapalbhati. कपालभाति क्रिया करने के पश्चात ध्यान की अवस्था

6. पीलिया और हृदय रोग से ग्रस्त रोगियों को यह क्रिया नहीं करनी चाहिए।

7. बुखार, दस्त और अत्यधिक कमजोरी होने की स्थिति में कपालभाति क्रिया नहीं करनी चाहिए।

8. प्रदूषण युक्त वातावरण जैसे की धूल, धुआ, दुर्गंध युक्त और गर्म वातावरण में कपालभाति क्रिया नहीं करनी चाहिए।

9. कपालभाती खाना खाने से पहले करें। खाना खाने के 4 घंटे के बाद तक कपालभाति क्रिया ना करें।

कपालभाति क्रिया का अर्थ। kapalbhati mein kapal shabd sharir ke kis ang ko darshata hai.

कपालभाति क्रिया योग में षटकर्म अथवा हठयोग की एक क्रिया है। कपालभाती में कपाल का अर्थ मस्तिष्क और भाति का अर्थ स्वच्छता अर्थात वह किया जिससे मस्तिष्क स्वस्थ होता है। क्योंकि इस क्रिया में सिर चमकदार तथा तेज युक्त बनता है इसी कारण इस क्रिया को कपालभाती किया कहा जाता है।

संस्कृत में कपाल का अर्थ होता है माथा या ललाट और भाति का अर्थ होता है तेज़। कपालभाति क्रिया को नियमित रूप से करने पर मुख पर आंतरिक तेज उत्पन्न होता है।

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