धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध आपके मानसिक स्वास्थ्य से और (अल्जाइमर रोग।)

fitnessधीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध आपके मानसिक स्वास्थ्य से और (अल्जाइमर रोग।)

वैज्ञानिकों के अनुसार धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध मानसिक स्वास्थ्य की कमजोरी को प्रदर्शित करता है। इंटरनेशनल जनरल ऑफ गेरिएट्रिक सायकेट्री मैं प्रकाशित शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध आपके मानसिक स्वास्थ्य से बताया है।

सैन एंटोनियो लॉन्गनीटूडनल स्टडी ऑफ एजिंग(salsa) ने एक अध्ययन किया। जिसमें वैज्ञानिकों ने 370 लोगो के चलने की गति तथा मस्तिष्क के मध्य सामंजस्य बैठाने की क्षमता के बीच संबंध निकाला। वैज्ञानिकों के द्वारा इस क्षमता को मापने के लिए समय स्थान ध्यान याद भाषा सहित विभिन्न पहलुओं के आधार पर एक प्रयोग किया। शोधकर्ताओं के अनुसार 10 साल के प्रयोग में पाया गया कि धीमी गति का सीधा संबंध मानसिक स्वास्थ्य से है। शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन लोगों के चलने की गति धीमी है। उनका मानसिक स्वास्थ्य कमजोर है तथा उनके मानसिक स्वास्थ्य का स्कोर कम था। वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि एथेरोस्कलेरोसिस बीटा एमिलोयड और ताऊ प्रोटीन असामान्य रूप से मस्तिष्क में जमा हो जाए तो चाल और मानसिक स्वास्थ्य की क्षमता में बदलाव हो सकता है इसका संबंध अल्जाइमर बीमारी से भी है।

धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध आपके मानसिक स्वास्थ्य से और (अल्जाइमर रोग।)

धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध अल्जाइमर रोग हो सकता है

धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध अल्जाइमर रोग हो सकता है

अल्जाइमर रोग लगातार बढ़ने वाला रोग है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है तथा अन्य दिमागी कार्य करने की क्षमता कम होती जाती है। यह मनोरम तथा डिमेंशिया का सबसे आम कारण है। इस रोग में मस्तिष्क की कोशिकाएं अपने आप बनती और बिगड़ती रहती है अर्थात स्वयं बनती है तथा नष्ट होती रहती है। जिसके याददाश्त और मानसिक कार्यों में लगातार गिरावट होती रहती है।

अल्जाइमर रोग के कारण।

धीमी पड़ती चाल का सीधा संबंध आपके मानसिक स्वास्थ्य से और (अल्जाइमर रोग।)
अल्जाइमर.

अल्जाइमर रोग के कारक क्या हो सकते हैं- अल्जाइमर रोग निम्न कारणों से भी हो सकता है

1. आयु- व्यक्ति की आयु 85 वर्ष से अधिक होने के पश्चात अल्जाइमर रोग होने का जोखिम बढ़ जाता है

2. – अनुवांशिक- परिवार के लोगों में अल्जाइमर रोग होने पर आनुवांशिक तौर पर अल्जाइमर रोग होने का जोखिम अधिक होता है।

3. अगर पहले से सिर पर चोट लगी हो तो भी यह रोग हो सकता है।

4 तनाव का शिकार होना- तनाव एक मुख्य कारण है जिससे अल्जाइमर रोग होने की संभावना बढ़ती है। जो व्यक्ति अधिकतर समय तनाव से ग्रस्त रहते हैं उनमें अल्जाइमर रोग होने की संभावना काफी अधिक होती है।

अल्जाइमर रोग से बचने के उपाय

वैसे तो अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है। लेकिन टुमारो गाने वाले व्यक्ति को उचित देखभाल सुविधा तथा सहायता के द्वारा उसके जीवन को पहले से बेहतर बनाया जा सकता है। अल्जाइमर रोग होने वाले व्यक्ति को पता चलने के पश्चात उसे तुरंत इलाज शुरू कराना चाहिए। ताकि वह समय रहते ठीक हो जाए। तो आइए जानते हैं अल्जाइमर रोग से निवारण पाने के कुछ उपाय।

1. व्यायाम तथा एक्सरसाइज करना- यदि अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति प्रतिदिन व्यायाम तथा एक्सरसाइज करें तो अल्जाइमर रोग का इलाज करने में मदद मिलती है। एक्सरसाइज करने से दिमाग की मांसपेशियां शांत होती है जिस से अल्जाइमर रोग में कमी आती है।

2. दवाई तथा थेरेपी- अल्जाइमर रोग से ग्रसित व्यक्ति को डॉक्टर के द्वारा थेरेपी दी जाती है तथा कुछ दवाइयां दी जाती है जिसे अल्जाइमर को बढ़ने से रोका जाता है। दवाइयां तथा थेरेपी अल्जाइमर को ठीक करने में मदद करती है।

3. उच्च रक्तचाप हाइपरकोलेस्ट्रॉलेमिया, मधुमेह तथा धूम्रपान जैसे कार्डियोवैस्कुलर वाले जोखिम कारक से इस रोग के बढ़ने की संभावना अधिक होती है । अतः व्यक्ति को पहले इनसे छुटकारा पाना चाहिए।

4. रक्तचाप की दवाइयां इस रोग के जोखिम को कम करती है। तथा स्टेटिन जो कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं। हालांकि पूर्ण तो इस बीमारी को खत्म करने में सहायक नहीं है।