Hindi kahani. चित्तौड़ के राजकुमार चंदा की कहानी। हिन्दी कहानी।

Hindi kahani. चित्तौड़ के राजकुमार चंदा की कहानी। हिन्दी कहानी।

चित्तौड़ के बड़े राजकुमार चन्दा शिकार खेलने निकले थे । अपने साथियों के साथ वे दूर निकल गये थे । उन्होंने उस दिन श्रीनाथद्वारे में रात बिताने का निश्चय किया था । जब शाम होने पर वे श्रीनाथद्वारे की ओर लौटने लगे , तब पहाड़ी रास्ते में एक घोड़ा मरा हुआ पड़ा दिखायी दिया । राजकुमार ने कहा – ‘ किसी यात्री का घोड़ा यहाँ मर गया है । घोड़ा आज का ही मरा है । यहाँ से आगे ठहरने का स्थान तो श्रीनाथद्वारा ही है । वह यात्री वहीं गया होगा । ‘ श्रीनाथद्वारे पहुँचकर राजकुमार ने सबसे पहले यात्री की खोज की । उनके मन में एक ही चिन्ता थी कि यात्रा में घोड़ा मर जानेसे यात्री को कष्ट होगा । राजकुमार उसे दूसरा घोड़ा दे देना चाहते थे । लेकिन जब सेवकों ने बताया कि यात्री यहाँ नहीं आया है , तब राजकुमार और चिन्तित हो गये । वे कहने लगे – ‘ अवश्य वह यात्री मार्ग भूलकर कहीं भटक गया है । वह इस देश से अपरिचित होना चाहिये । रात्रि में वन में पता नहीं , वह कहाँ जायगा । तुम लोग टोलियाँ बनाकर जाओ और उसे ढूँढ़कर ले आओ । ‘ राजकुमार की आज्ञा पाकर उनके सेवक मशालें जलाकर तीन – तीन , चार – चार की टोलियाँ बनाकर यात्री को ढूँढ़ने निकल पड़े ।

बहुत भटकने पर उनमें से एक टोली के लोगों को किसी ने पुकारा । जब उस टोली के लोग पुकारने वाले के पास पहुँचे , तब देखा कि एक बूढ़ा और एक नवयुवक एक घोड़े पर बहुत – सा सामान लादे पैदल चल रहे हैं । वे लोग बहुत घबराये और थके हैं । राजकुमार के सेवकों ने कहा ‘ आप लोग डरें नहीं । हम लोग आपको ही ढूँढ़ने निकले हैं । ‘ बूढ़े ने बड़े आश्चर्य से कहा – ‘ हम लोग तो अपरिचित हैं । विपत्ति के मारे घर द्वार छोड़कर श्रीनाथ जी की शरण लेने निकल पड़े हैं। आज ही रास्ते में हमारा घोड़ा गिर पड़ा और मर गया। यहां हम लोग रास्ता भूलकर भटक पड़े हैं हम लोगों को आप लोग भला कैसे ढूंढने निकले हैं।

सेवकोंने कहा – ‘ हमारे राजकुमार ने आपका मरा घोड़ा देख लिया था । वे प्रत्येक बात में बहुत सावधानी रखते हैं । उन्होंने जान लिया कि आप लोग मार्ग भूल गये होंगे । ‘ एक राजकुमार इतनी सावधानी रखें और ऐसे दयालु हों , यह दोनों यात्रियों को बहुत अद्भुत लगा । श्रीनाथद्वारे आकर उन्होंने राजकुमार के प्रति कृतज्ञता प्रकट की । राजकुमार चन्दा बोले – ‘ यह तो प्रत्येक मनुष्यका कर्तव्य है कि वह सावधान रहे और कठिनाई में पड़े लोगों की सहायता करे । मैंने तो अपने कर्तव्य का ही पालन किया है ।